Motivational Story #4: The Hope Experiment - जीवन में आशा का महत्व

Here you can check Motivational Story in Hindi #4 and get Motivated in life.

The Hope Experiment: जीवन में आशा का महत्व 

यहां आप मोटिवेशनल स्टोरी पढ़ सकते हैं और जीवन में मोटिवेट हो सकते हैं।

प्रेरक कहानी #4:

यह कहानी हमे जीवन में आशा (उम्मीद) के महत्व को बताती है | 

Motivational Story #4: The Hope Experiment

1950 के दशक में, एक प्रोफेसर जॉन्स हॉपकिन्स ने एक प्रसिद्ध डूबते हुए चूहों के मनोविज्ञान पर प्रयोग किया। इस प्रयोग ने बताया कि जीवन में कठिन से कठिन परिस्थितियों पर भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए | 

डूबने वाले चूहों पर मनोविज्ञानिक प्रयोग
इस प्रयोग में कर्ट ने चूहों को एक पानी से भरी बाल्टी में छोड़ दिया ताकि ये पता लगाया जा सके कि चूहे पानी में तैरते हुए कितनी देर तक जिन्दा रहते हैं और क्या प्रयास करते हैं | कर्ट के प्रयोग इस बात पर केंद्रित थे कि चूहों को डूबने से मरने में कितना समय लगता है। उन्होंने चूहों को पानी से भरी बाल्टियों में रखकर अपने प्रयोग किए और देखा कि वे कितने समय तक जीवित रहे। 

कर्ट ने एक बाल्टी को पानी से पूरा भर दिया और उसमें एक चूहे को डाल दिया | चूहा उस पानी से भरी बाल्टी में गिरते ही हड़-बड़ाने लगा और बहार निकलने की कोशिश करने लगा | चूहा कुछ मिनटों तक पानी से निकलने का प्रयास करता रहा और फिर डूब गया | 

उसके बाद उसने कुछ और चूहों पर यही प्रयोग किया गया और उनमे से कुछ दस मिनट तो कुछ बीस मिनट तक तैरते रहे जब तक की डूब नहीं गए | 

कुछ समय पश्चात कर्ट ने अपने शोध में कुछ बदलाव किया। उसने पानी से भरी बाल्टी में एक दूसरे चूहे को डाल दिया। वह चूहा बाहर आने के लिये बहुत प्रयास करने लगा लेकिन जैसे ही उस चूहे ने प्रयास करना बन्द किया और डूबने लगा। ठीक तभी कर्ट ने उस चूहे को पानी से बाहर निकाल लिया। 

कुछ समय तक उस चूहे को पानी से बाहर ही रखा लेकिन थोड़ी देर के बाद उस चूहे को कर्ट ने पुनः उसी पानी की बाल्टी में डाल दिया। पानी से भरे उस जार में दोबारा डेल जाने पर चूहे ने फिर से पानी से बाहर निकलने के लिए अपनी भरपूर कोशिश शुरू कर दी। लेकिन अब दुबारा पानी में डाले जाने के बाद अब उस चूहे हैरान कर दिया | 

कर्ट ने तो सोच था कि अब यह चूहा मुश्किल से कुछ मिनट तक ही कोशिश कर पाएगा। लेकिन हुआ इसके विपरीत। 

चूहा जार में 72 घंटो तक तैरता रहा और अपने जीवन बचाने के लिये सँघर्ष करता रहा। साठ घँटे तक चूहा पानी से भरे जार में अपने स्वयं को बचाने के लिये पूरी तत्परता से सँघर्ष करता रहा। यह काफी चकित करने वाला था । 

पहले जो चूहा तो मात्र 15-20 मिनट में ही परिस्थितियों के सामने हथियार डाल चुका था दुबारा पानी में डाले जाने पर वही चूहा 72 घंटे तक तैरता रहा। 

कर्ट ने अपने इस शोध क नाम ‘The Hope Experiment’ रखा | 

जब उस चूहे को पहली बार पानी में डाला गया था तो वह कुछ ही मिनटों में डूबने की कगार पर पहुंच गया था । उसने आशा छोड़ दी थी | पर जैसे ही उसको ये पता चला कि वह बच सकता है तो दूसरी बार पानी में डाले जाने पर वह लगातार 72 घंटों तक प्रयास करता रहा | इस आशा में कि वह फिर से बच जाएगा | जिस हाथ ने उसे पानी में फेंका था वही उसे बाहर निकलेगा | 

दोस्तों इस प्रयोग से हमे ये शिक्षा मिलती है कि जीवन में कैसी भी मुश्किल से मुश्किल स्थिति क्यों न आ जाए, लेकिन कभी हार नहीं माननी चाहिए। हमे अपनी उम्मीद बरकरार रखनी चाहिए | चाहे जिंदगी में कितनी ही असफलता मिले पर कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए क्योंकि मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। बस सही दिशा में अपना प्रयास जारी रखिये और एक दिन आपको सफलता जरूर मिलेगी |